राज़-ए-भूतिया हवेली
राज़-ए-भूतिया हवेली गाँव के किनारे एक पुरानी, झिल्ली-सी हवेली थी जिसे लोग "भूतिया हवेली" कहते थे। हवेली का रंग कब का उदास हो चुका था, दीवारों पर कालिख के दाग और शीशों पर मोटी- मोटी धूल की परतें जम चुकी थीं। लोग कहते थे कि जो भी उस हवेली में रात बिताता है, वह कभी वापस नहीं आता। राहुल एक शहर का नौजवान था, जो अपनी यूनिवर्सिटी के लिए एक डॉक्यूमेंट्री बना रहा था। उसने फैसला किया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस हवेली के राज़ खोलने जाएगा। लोग उसे समझाते रहे, "वह हवेली खतरनाक है, मत जाना वहाँ।" पर राहुल का जज़्बा और जिज्ञासा ज़्यादा था। एक रात, राहुल और उसके तीन दोस्त—अमन, समीर, और नेहा—टॉर्च लेकर हवेली के अंदर घुस गए। बाहर रात की ठंडी हवा चल रही थी, और पेड़ों की सर्द शाखाएं अजीब सी आवाज़ कर रही थीं। जैसे किसी पुरानी कहानी में, वे चारों अंधेरों के बीच घुस गए। हवेली के अंदर सब कुछ पुराना और भयानक लग रहा था। फ़र्श पर पुराने कपड़े, टूटी हुई फर्नीचर, और एक सूखी सी गंध थी जो केवल खौफ के साथ महसूस होती थी। राहुल ने कैमरा चालू किया और बोला, "चलो, सब कुछ रिकॉर्ड करते...