राज़-ए-भूतिया हवेली

  

राज़-ए-भूतिया हवेली

गाँव के किनारे एक पुरानी, झिल्ली-सी हवेली थी जिसे लोग "भूतिया हवेली" कहते थे। हवेली का रंग कब का उदास हो चुका था, दीवारों पर कालिख के दाग और शीशों पर मोटी- मोटी धूल की परतें जम चुकी थीं। लोग कहते थे कि जो भी उस हवेली में रात बिताता है, वह कभी वापस नहीं आता।

राहुल एक शहर का नौजवान था, जो अपनी यूनिवर्सिटी के लिए एक डॉक्यूमेंट्री बना रहा था। उसने फैसला किया कि वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस हवेली के राज़ खोलने जाएगा। लोग उसे समझाते रहे, "वह हवेली खतरनाक है, मत जाना वहाँ।" पर राहुल का जज़्बा और जिज्ञासा ज़्यादा था।

एक रात, राहुल और उसके तीन दोस्त—अमन, समीर, और नेहा—टॉर्च लेकर हवेली के अंदर घुस गए। बाहर रात की ठंडी हवा चल रही थी, और पेड़ों की सर्द शाखाएं अजीब सी आवाज़ कर रही थीं। जैसे किसी पुरानी कहानी में, वे चारों अंधेरों के बीच घुस गए।

हवेली के अंदर सब कुछ पुराना और भयानक लग रहा था। फ़र्श पर पुराने कपड़े, टूटी हुई फर्नीचर, और एक सूखी सी गंध थी जो केवल खौफ के साथ महसूस होती थी। राहुल ने कैमरा चालू किया और बोला, "चलो, सब कुछ रिकॉर्ड करते हैं।"

वे लोग हवेली के बड़े हॉल में पहुंचे, जहां चांदनी रात के बावजूद अंधेरा ज़्यादा था। राहुल ने टॉर्च का बीम दीवार पर लगाया तो देखा वहाँ एक बड़ी सी पेंटिंग थी—एक औरत की तस्वीर, जो किसी ग़म में डूबी हुई लग रही थी। उस पेंटिंग के नीचे छोटे अक्षरों में कुछ लिखा था:
"यह जगह मेरी क़ब्र है।"

सब लोग थोड़ा डर गए, पर राहुल बोला, "यह सब तो कहानियां हैं, चलो आगे चलते हैं।"

वे लोग हवेली के ऊपर के फ़्लोर की तरफ बढ़े। हर कमरे में जाकर राहुल ने अपनी टॉर्च घुमाई, कैमरा रिकॉर्ड करता रहा। तभी एक कमरे का दरवाज़ा अपने आप धीरे-धीरे खुल गया। सब के रोंगटे खड़े हो गए और खामोशी छा गई।

नेहा ने ठंडी आवाज़ में कहा, "क्या किसी ने यह दरवाज़ा खोला?" सब ने चुप होकर दरवाज़े की तरफ देखा, पर कोई नजर नहीं आया।

अमन ने हिम्मत दिखाते हुए दरवाज़ा धक्का दिया और अंदर गया। वह कमरा एक बेडरूम था, पुराना सा बिस्तर, एक ड्रेसिंग टेबल, और एक जादुई सी घड़ी थी जो अभी भी चल रही थी, बिना किसी बैटरी के।

समीर ने घड़ी को हाथ लगाया, तभी उसकी उंगलियों से कुछ ऐसी ठंडी हवा निकली जैसे कोई भूत उसके हाथ छू गया हो। सबके सर हिलने लगे।

अचानक, कमरे की खिड़की से एक तेज हवा का झोंका आया, और सारे कैंडल्स जो किसी ने लगाए थे, वे झट से बुझ गए।

"यह सब क्या हो रहा है?" नेहा ने डर कर पूछा।

तभी सबके फोन में एक साथ एक अजीब सी आवाज़ आई, एक लड़की की आवाज़ जो रोने जैसी लग रही थी:
"मुझे यहाँ से निकाल दो... मैं फंसी हुई हूँ... मेरी जान बचाओ..."

राहुल ने कैमरा उस दिशा में पॉइंट किया जहाँ आवाज़ आ रही थी। वहाँ एक पुराना अलमारी था, जिसमें ऐसे कुछ कपड़े थे जो कभी किसी शादी के हो सकते थे। अलमारी का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला।

सब लोग हैरान थे, और उस अलमारी के अंदर से एक ठंडी, सफेद हाथ बाहर निकला—एक रूहानी चेहरा सामने आया, जिसकी आँखें खून जैसी लाल थीं।

नेहा चीख़ उठी, "भागो! भागो यहाँ से!"

पर तब तक सब लोग हवेली के अंदर फंस चुके थे। हवेली के दरवाज़े अपने आप बंद हो गए। लाइट बिलकुल चली गई, सिर्फ चांदनी की थोड़ी रोशनी थी।

राहुल ने अपना कैमरा जल्दी से बंद किया और बोला, "हमें यहाँ से निकलना होगा, जल्दी!"

पर हवेली में कुछ और था—एक आवाज़, जो उनके पीछे-पीछे आ रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पूरी हवेली में उनका पीछा कर रहा हो।

वे लोग भागने लगे, पर रास्ते में कमरे के दरवाज़े ऐसे खुलते बंद हो रहे थे, जैसे कोई अदृश्य बलवान उन्हें रोक रहा हो।

नेहा को लगा कोई उसके कंधे पर हाथ रख रहा है। जब उसने मुँह मोड़ा तो कोई नहीं था। पर उसके कपड़ों में एक ठंडी, सर्द हवा छिपी हुई थी।

समीर ने कहा, "यह हवेली किसी की नहीं, यह किसी की क़ब्र है।"

तब राहुल ने उस पेंटिंग की तरफ देखा जिसमें वह औरत थी। उसने महसूस किया कि वह औरत उस हवेली की असली भूतनी थी, जो अपनी मौत का बदला लेना चाहती थी।

वह औरत उनके पास आई, उसके हाथ नीचे-नीचे से बढ़ते हुए, उनका दिल तेज़-तेज़ धड़कने लगा।

अमन ने जोर से कहा, "क्या कोई मंत्र या कुछ है जो उसे शांत कर सके?"

नेहा को याद आया कि उसकी दादी ने कहा था कि भूतिया जगह पर शांति के लिए कोई सूरत या दुआ पढ़नी चाहिए।

सबने अपने मन में सूरत पढ़ना शुरू किया। धीरे-धीरे हवेली में से एक गर्म रोशनी फैलने लगी। भूतनी की आत्मा दर्द में लिपटी हुई फिर धीरे-धीरे हवा में घुल गई।

जब रोशनी पूरी हवेली से गायब हो गई, हवेली के दरवाज़े अपने आप खुल गए।

वे लोग भागकर बाहर निकले, रात के अंधेरों में अपनी जान बचाने के लिए शुक्रिया अदा करते हुए।

राहुल ने कहा, "अब हमारी डॉक्यूमेंट्री के लिए असली कहानी मिली है—सच में किसी जगह पर भूत होते हैं, और वे हमें अपनी कहानी सुनाते हैं।"

वे लोग कभी भी वापस उस हवेली के पास नहीं गए, पर उनके दिल में हमेशा उस रात का वह खौफ और राज़ छुपा रहा।


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